राजस्थान में रोज 6 हजार साइबर ठगी की शिकायतें, 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी; समय पर 1930 पर कॉल से बच सकती है रकम
जयपुर:राजस्थान में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। प्रदेश में प्रतिदिन 6 हजार से अधिक साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जबकि रोजाना करीब 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हो रही है।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा के डीआईजी शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने पर घबराने की बजाय तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत मिलने पर संबंधित बैंकों को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है, जिससे संदिग्ध खाते में पहुंचे पैसे को होल्ड करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
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उन्होंने बताया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में घटना के 20 मिनट से एक घंटे का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवधि में शिकायत दर्ज होने पर ठगी गई रकम वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके बाद पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए राजस्थान पुलिस हेल्पलाइन 1930 की कॉल लाइनों की संख्या 32 से बढ़ाकर 60 कर रही है, ताकि किसी भी पीड़ित की शिकायत छूट न जाए। वर्तमान में पुलिस मुख्यालय, जयपुर कमिश्नरेट और चार रेंज मुख्यालयों पर कॉल टेकर्स और डिस्पैचर तैनात हैं।
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डीआईजी ने बताया कि अब तक साइबर ठगी की लगभग 26 प्रतिशत राशि पीड़ितों को वापस दिलाई जा चुकी है। इसके लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से बैंकिंग प्रक्रिया पूरी की जाती है।
प्रदेश में फिलहाल 46 साइबर पुलिस स्टेशन संचालित हैं, जिनकी संख्या जल्द बढ़ाकर 49 की जाएगी। वहीं, 5 लाख रुपये से अधिक के डिजिटल अरेस्ट और इन्वेस्टमेंट स्कैम जैसे मामलों में स्वतः एफआईआर दर्ज की जाती है।

साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राजस्थान पुलिस ऑपरेशन म्यूलहंटर, साइबर कवच, एंटी वायरस और वज्र प्रहार जैसे विशेष अभियान भी लगातार चला रही है।


