ठाणे में “तपोन्मेष—तप के अनकहे आयाम” विषय पर जैन वाङ्मय कार्यशाला आयोजित

ठाणे में “तपोन्मेष—तप के अनकहे आयाम” विषय पर जैन वाङ्मय कार्यशाला आयोजित

ठाणे में “तपोन्मेष—तप के अनकहे आयाम” विषय पर जैन वाङ्मय कार्यशाला आयोजित

तेरापंथ महिला मंडल, ठाणे द्वारा जैन वाङ्मय “अप्पदीवो भव” कार्यशाला के अंतर्गत “तपोन्मेष — तप के अनकहे आयाम” विषय पर आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री कुलदीप कुमार जी के सानिध्य में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यशाला का आयोजन 30 अगस्त किया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य तप के विविध, अनकहे एवं अल्पज्ञात आयामों को समझना तथा तप के माध्यम से आत्म-साधना, अनुशासन और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में प्रेरणा प्राप्त करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री मुकुल कुमार जी के द्वारा नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से हुआ।

तत्पश्चात महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण द्वारा वातावरण को आध्यात्मिक एवं मंगलमय बना ।

कार्यक्रम में तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती संगीता जी चंडालिया ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए उपस्थित सभी अतिथियों एवं धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाओं का आत्मीय स्वागत किया।


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इसके पश्चात श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ठाणे के अध्यक्ष श्री नरेश जी बाफना ने अपने विचारों के माध्यम से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और उपस्थित जनों को प्रेरित किया।

श्रीमती अपूर्वा जी श्रीश्रीमाल ने गीतिका के माध्यम से अपने भावों की अभिव्यक्ति दी ।

इसके बाद श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा मुंबई के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र जी कोठारी ने अपने प्रेरणादायी विचारों से उपस्थितजनों को लाभान्वित किया।

कार्यशाला का मुख्य आकर्षण रहा आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री मुकुल कुमार जी का प्रेरणा पाथेय। मुनिश्री ने “तपोन्मेष — तप के अनकहे आयाम” विषय पर अत्यंत सरल, प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक मार्गदर्शन प्रदान किया।

अपने प्रेरणाप्रद संबोधन में तप के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बड़ी तपस्याओं को सहजता से करने, तपस्या के दौरान होने वाली सामान्य भूलों, पित्त एवं कमजोरी जैसी समस्याओं से बचाव, जैन धर्म में वर्णित दुर्लभ एवं अल्पज्ञात तपस्याओं तथा तेरापंथ की तपोगाथाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया।

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साथ ही तपस्या में भाव, आहार, दिनचर्या एवं अन्य पहलुओं की भूमिका को भी समझाया।

मुनिश्री के प्रेरणाप्रद विचारों ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं में तप के प्रति नई समझ, जागरूकता एवं प्रेरणा का संचार किया।

कार्यक्रम के पश्चात इस आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले प्रयोजकगण का सम्मान किया गया, जिनका नाम उल्लेख कार्यक्रम की सहसंयोजिका श्रीमती निशा जी भटेवरा ने किया।

अंत में तेरापंथ महिला मंडल की कोषाध्यक्ष श्रीमती लीला सिंघवी ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने पूज्य मुनिश्री, अतिथिगण, प्रयोजकगण, पदाधिकारीगण, कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की।

ठाणे में “तपोन्मेष—तप के अनकहे आयाम” विषय पर जैन वाङ्मय कार्यशाला आयोजित

कार्यक्रम का कुशल संचालन तेरापंथ महिला मंडल ठाणे की मंत्री श्रीमती खुशबू पामेचा ने किया यह जानकारी मुंबई सभा के प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ ने दी

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