नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

बीकानेर (श्रेयांस बैद):महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय परिसर में नव-निर्मित भवनों का नामकरण भारतीय ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के नाम पर किए जाने के क्रम में बुधवार को संबंधित भवनों में उनके चित्रों एवं जीवनियों की स्थापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के न्यासीगण ने उपस्थित होकर संबंधित महापुरुषों के जीवन-दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन एवं समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित के मुख्य आतिथ्य में हुआ।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय परिसर में नव-निर्मित भवनों का लोकार्पण 7 जून, 2026 को माननीय राज्यपाल, राजस्थान, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल तथा उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा द्वारा किया गया था।

इन भवनों का नामकरण भारतीय ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के नाम पर किया गया है।विश्वविद्यालय द्वारा नव-निर्मित भवनों का नामकरण भारतीय संस्कृति, अध्यात्म एवं ज्ञान परंपरा के महान विभूतियों के सम्मान में किया गया है।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

इसके अंतर्गत सेंट्रल फैसिलिटी फॉर रिसर्च का नाम आचार्य तुलसी भवन, एग्जामिनेशन सेंटर का नाम गुरु जाम्भेश्वर भवन, सेंट्रल क्लासरूम (विज्ञान) का नाम मां करणी भवन, सेंट्रल क्लासरूम (कला) का नाम संत रामसुखदास भवन, एनआईईएलआईटी भवन का नाम संवित सदन, एकेडमिक-5 का नाम कपिल मुनि भवन, एकेडमिक-6 का नाम प्रचेता भवन तथा ध्वज वृत्त (फ्लैग सर्किल) के दाहिनी ओर स्थित उद्यान का नाम अमृता देवी उद्यान रखा गया है।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

इन भवनों में संबंधित महापुरुषों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित कर विद्यार्थियों और आगंतुकों को उनके जीवन-दर्शन से परिचित कराने की पहल की गई है

कार्यक्रम में आचार्य तुलसी, मां करणी, कपिल मुनि, संत रामसुखदास जी महाराज एवं संत सोमगिरी जी महाराज के चित्रों एवं जीवन परिचय का अनावरण किया गया। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से पधारे न्यासीगण एवं प्रतिनिधियों ने इन महापुरुषों के जीवन-दर्शन, आध्यात्मिक योगदान तथा समाज के प्रति उनके अविस्मरणीय कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

कपिल मुनि ट्रस्ट की ओर से बनवारीलाल सेवग, श्री करणी माता मंदिर न्यास की ओर से शंकरदान, आचार्य तुलसी के संबंध में सुरपत बोथरा तथा संत रामसुखदास जी महाराज की ओर से श्री श्यामसुन्दर महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में इन महान विभूतियों के जीवन, दर्शन एवं उनके द्वारा स्थापित मानवीय मूल्यों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

वक्ताओं ने कहा कि इन संतों और ऋषियों का जीवन समाज को सत्य, सेवा, सदाचार, आध्यात्मिक चेतना एवं राष्ट्रहित के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

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उन्होंने कहा कि भवनों का नामकरण भारतीय ऋषि-मुनियों एवं संतों के नाम पर करना तथा उनके जीवन-दर्शन को विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करना विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक दृष्टि का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इन महापुरुषों के आदर्शों को आत्मसात कर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

नव-निर्मित भवनों में ऋषि-मुनियों एवं संत विभूतियों के चित्र एवं जीवनियां स्थापित

इस अवसर पर विश्वविद्यालय कुलसचिव यशपाल आहूजा, वित्त नियंत्रक देवेन्द्र सिंह राठौड, अधिष्ठाता-छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चारण, सह अधिष्ठाता-छात्र कल्याण डॉ. संतोष कंवर शेखावत, मुख्य कुलानुशासक डॉ. गौतम मेघवंशी, कुलानुशासक डॉ. अभिषेक वशिष्ठ, उमेश शर्मा डॉ. लीला कौर, विश्वविद्यालय आचार्य अनिल कुमार छंगाणी, प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. फौजा सिंह, अमरेश कुमार सिंह, डॉ. मानकेशव सैनी उपस्थित हुए।

अंत में कुलसचिव यशपाल आहूजा ने सभी अतिथियों, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से पधारे न्यासीगण तथा उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

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