तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

लूणकरणसर: अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की शाखा तेरापंथ युवक परिषद, लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय श्रीमती सुशीला देवी बरड़िया, धर्मपत्नी श्री गणेश जी बरड़िया, का मरणोपरांत नेत्रदान उनके पुत्र श्री मनोज कुमार एवं श्री ललित कुमार बरड़िया तथा परिवारजनों की सहमति से ई.बी.एस.आर.-चूरू चैप्टर के माध्यम से संपन्न हुआ।

तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

तेरापंथ युवक परिषद लूणकरणसर के अध्यक्ष श्री दिनेश गोलछा ने स्वर्गीय श्रीमती सुशीला देवी बरड़िया को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवारजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि परिवार द्वारा नेत्रदान जैसे पुनीत एवं मानवीय सेवा कार्य के लिए सहमति देना समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।

अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पवन मांडोत ने बताया कि अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद की 375 शाखा परिषदों के सहयोग से भारत एवं नेपाल में अब तक 3000 से अधिक मरणोपरांत नेत्रदान करवाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है।

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राष्ट्रीय महामंत्री श्री सौरभ पटावरी ने शाखा परिषद की जागरूकता एवं नेत्रदाता के परिवार की उत्कृष्ट भावना की सराहना करते हुए अधिक से अधिक लोगों से नेत्रदान अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

तेरापंथ युवक परिषद लूणकरणसर के नेत्रदान संयोजक श्री कपिल नवलखा ने बताया कि नेत्रदान को लेकर समाज में कई भ्रांतियां हैं।

नेत्रदान में पूरी आंख नहीं निकाली जाती, बल्कि केवल कॉर्निया की आवश्यक परत ली जाती है, जिससे मृतक के चेहरे अथवा शरीर के स्वरूप पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।

तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

परिवार की सहमति से लगभग किसी भी उम्र के व्यक्ति का मरणोपरांत नेत्रदान किया जा सकता है। मृत्यु के 6 से 8 घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया करवाना आवश्यक होता है।

तेयुप लूणकरणसर के सहयोग से स्वर्गीय सुशीला देवी बरड़िया का मरणोपरांत नेत्रदान

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