अब नहीं बजेगा इमरजेंसी अलर्ट! सरकार ने लिया बड़ा फैसला
अगर पिछले कुछ दिनों में आपके मोबाइल फोन पर भी तेज आवाज के साथ इमरजेंसी अलर्ट मैसेज आए हैं, तो अब उनसे जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
जी हां, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDMA ने फिलहाल सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि ये फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया है और अगले आदेश तक ये व्यवस्था बंद रहेगी।
यह सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया है कि अधिकारी किसी खास भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल यूजर्स को एक साथ और एक ही समय पर आपातकालीन अलर्ट भेज सकते हैं।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी एडवाइजरी के बाद सेल ब्रॉडकास्ट (CB) सेवा को देश में अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है। यानी अब फोन पर इमरजेंसी अलर्ट नहीं बजेगा।
शुक्रवार को आई इस एडवाइजरी के बाद शनिवार को अधिकारियों ने इस फैसले की पुष्टि की. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम एक एहतियाती उपाय के तौर पर उठाया गया है और आगामी आदेश तक यह निलंबन जारी रहेगा।
👉 यहां क्लिक करें
यह निलंबन इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम देश का वो मजबूत पब्लिक वार्निंग मैकेनिज्म है, जिसके जरिए किसी भी आपदा या आपातकाल के दौरान मोबाइल यूजर्स तक सीधे इमरजेंसी अलर्ट और जरूरी सूचनाएं पहुंचाई जाती हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इस सेवा को रोकने के पीछे की वजहें नहीं बताई हैं।
जयपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला: उड़ान भरते ही फ्लाइट से टकराया पक्षी, ATC ने कराया वापस लैंड
आपातकाल का ‘ब्रह्मास्त्र’ है सेल ब्रॉडकास्ट सेवा
आपको बता दें कि सेल ब्रॉडकास्ट सेवा का इस्तेमाल प्राकृतिक आपदाओं, सुरक्षा से जुड़ी गंभीर स्थितियों और अन्य आपातकालीन हालातों में रियल-टाइम अलर्ट जारी करने के लिए किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी बेहद तेजी से काम करता है। यानी संकट के समय जब आम मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाते हैं, तब भी यह सेवा काम करती है।
ऑपरेशनल प्रोटोकॉल की हो रही समीक्षा
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस सेवा को दोबारा कब शुरू किया जाएगा, इसकी जानकारी एनडीएमए से मिलने वाले अगले निर्देशों के आधार पर सही समय पर दे दी जाएगी। फिलहाल यह निलंबन पूरी तरह अस्थायी है।
प्रशासन इस पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और इसके ऑपरेशनल प्रोटोकॉल की गहराई से समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में जब इसे दोबारा तैनात किया जाए, तो यह पूरी तरह सुरक्षित और अधिक प्रभावी साबित हो सके।



