गौ को “राज्य माता” घोषित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
बल्लभगढ़ (सत्येंद्र राजवंशी):भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के मानद प्रतिनिधि श्रेयांस बैद ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र प्रेषित कर गौ को “राज्य माता” घोषित करने की मांग की है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि भारतीय वैदिक परम्परा, सनातन संस्कृति, कृषि सभ्यता तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गौ का विशेष स्थान रहा है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 एवं अनुच्छेद 51A(ग) की भावना के अनुरूप गौवंश के संरक्षण एवं संवर्धन को राज्य का दायित्व तथा प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य बताया गया है।
पत्र में बताया कि राजस्थान गौ-सेवा एवं जीव-दया की समृद्ध परम्परा वाला राज्य है। राज्य सरकार द्वारा गौपालन विभाग की स्थापना, गौशालाओं का संरक्षण, निराश्रित गौवंश के संवर्धन तथा देशी नस्लों के विकास के लिए संचालित योजनाएँ गौ-संरक्षण के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
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साथ ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन एवं गौ-आधारित डेयरी विकास, प्राकृतिक कृषि तथा पंचगव्य परम्परा का उल्लेख करते हुए गौ को पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण स्वावलम्बन एवं सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है।
श्रेयांस बैद ने अपने पत्र में बताया कि गौ केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, जैविक कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं पशु कल्याण का सशक्त प्रतीक है।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेशवासियों की व्यापक जनभावनाओं तथा संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करते हुए राजस्थान में गौ को “राज्य माता” घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया जाए।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसा निर्णय गौ-संरक्षण को नई दिशा देगा तथा राजस्थान को भारतीय संस्कृति, पशु कल्याण एवं सतत विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।

यहां ये भी गौरतलब है कि महाराष्ट्र राज्य द्वारा गौ को राज्य माता का दर्जा देकर देश का पहला राज्य बन दया है दूसरी और संत समुदाय लंबे समय से इसकी मांग करते हुए आंदोलन रत है एवं देश भर में गाय को राष्ट्र माता बनाने के लिए हस्ताक्षर अभियान संगोष्ठियों के माध्यम से आम जन में अलख जगाने का कार्य कर रहे हैं ।


