विश्व जूनोसिस दिवस पर कोटड़ा में पशु स्वास्थ्य शिविर, ब्रुसेलोसिस रोकथाम के लिए किसानों को किया जागरूक

विश्व जूनोसिस दिवस पर कोटड़ा में पशु स्वास्थ्य शिविर, ब्रुसेलोसिस रोकथाम के लिए किसानों को किया जागरूक

विश्व जूनोसिस दिवस पर कोटड़ा में पशु स्वास्थ्य शिविर, ब्रुसेलोसिस रोकथाम के लिए किसानों को किया जागरूक

50 भेड़ों के रक्त नमूने लिए गए, 45 किसानों ने लिया प्रशिक्षण; विशेषज्ञों ने पशुजन्य रोगों से बचाव के बताए उपाय

 बीकानेर(श्रेयांस बैद):  पशु और मानव स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा मानने वाली ‘वन हेल्थ‘ अवधारणा को साकार करने की दिशा में विश्व जूनोसिस दिवस के अवसर पर बीकानेर जिले के कोटड़ा गांव में पशु स्वास्थ्य एवं जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।

शिविर में पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण, ब्रुसेलोसिस की जांच तथा पशुपालकों को पशुजन्य रोगों से बचाव के प्रति जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ए.आर.सी., आईसीएआर-सीएसडब्ल्यूआरआई, बीकानेर की प्रभारी डॉ. निर्मला सैनी ने की। मुख्य अतिथि एस.पी. मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के वरिष्ठ प्रदर्शक एवं नेशनल वन हेल्थ प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ जूनोसिस के सह-अन्वेषक (को-पी.आई.) डॉ. दीप शिखर आचार्य रहे।


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कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष चोपड़ा, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार, वैज्ञानिक डॉ. सुमनिल मारवाह, वैज्ञानिक डॉ. चेतन पाटिल एन.डी. तथा तकनीकी सहायक राम सिंह की उपस्थिति रही।

शिविर के दौरान भेड़ों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक उपचार किया गया। विभिन्न झुंडों में ब्रुसेलोसिस की आशंका को देखते हुए 50 भेड़ों के रक्त नमूने जांच के लिए एकत्रित किए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर जांच और निगरानी से इस रोग की रोकथाम में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

जागरूकता सत्र में किसानों को ब्रुसेलोसिस सहित अन्य जूनोटिक (पशुजन्य) रोगों की जानकारी देते हुए बताया गया कि ये रोग पशुओं से मनुष्यों में भी फैल सकते हैं। विशेषज्ञों ने गर्भपातित भ्रूण एवं अन्य जैविक अपशिष्टों के सुरक्षित निस्तारण, संक्रमित पशुओं के पृथक प्रबंधन, स्वच्छता बनाए रखने तथा व्यक्तिगत सुरक्षा उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

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मुख्य अतिथि डॉ. दीप शिखर आचार्य ने कहा कि ब्रुसेलोसिस एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य रोग है। पशुपालकों की जागरूकता, समय पर जांच और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर इस संक्रमण के प्रसार को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को मानव ब्रुसेलोसिस के लक्षणों, बचाव और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी।

विश्व जूनोसिस दिवस पर कोटड़ा में पशु स्वास्थ्य शिविर, ब्रुसेलोसिस रोकथाम के लिए किसानों को किया जागरूक

कार्यक्रम में कुल 45 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। शिविर के माध्यम से पशु एवं मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सामूहिक जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

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