₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना से किसानों और गौशालाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
नई दिल्ली (श्रेयांस बैद): केंद्र सरकार के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा GOBARdhan (गोबरधन) राष्ट्रीय परिपत्र जैव-ऊर्जा योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद किसानों, पशुपालकों और गौशाला संचालकों में उत्साह का माहौल है।
योजना के तहत वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लगभग ₹23,731 करोड़ खर्च किए जाएंगे, जिससे गोबर, कृषि अवशेष एवं अन्य जैविक कचरे से संपीडित बायोगैस (CBG) और जैविक खाद का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
इस योजना का उद्देश्य “कचरे से कंचन” की अवधारणा को साकार करते हुए गोबर और जैविक अपशिष्ट को आय के नए स्रोत में बदलना है। इससे किसानों को गोबर का उचित मूल्य मिलने के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिलेगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस आधारित उद्योगों और रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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गौशालाओं के लिए भी यह योजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। अब गौशालाओं में प्रतिदिन निकलने वाला गोबर बायोगैस संयंत्रों के लिए उपयोगी संसाधन बनेगा। गैस उत्पादन के बाद बचने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग होगी, जिससे प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, इससे देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।


