जल संरक्षण के लिए परंपरागत जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर दिया जोर
बीकानेर (श्रेयांस बैद):महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा गोदित ग्राम रिड़मलसर पुरोहितान में जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

गोदित ग्राम प्रभारी डॉ. गौतम कुमार मेघवंशी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय की ओर से गोदित ग्राम में संचालित गतिविधियों एवं आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है, जिसके लिए जनभागीदारी आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल छंगाणी ने कहा कि राजस्थान की परंपरागत जल संरक्षण प्रणालियां सदियों से यहां के जीवन का आधार रही हैं।
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उन्होंने तालाब, जोहड़, नाड़ी एवं अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष बल देते हुए कहा कि वर्तमान जल संकट के समाधान के लिए इन व्यवस्थाओं को पुनः जीवंत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर ठोस प्रयास भी आवश्यक हैं।

इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में ग्रामीणों ने जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की तथा गांव में जल स्रोतों के संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर वार्ड पंच रिजवान, सोफिन सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हरीश सहारण, बेरिसाल सिंह, नीरज पेंसिया, चार्ल्स बेवेज सहित अन्य विद्यार्थियों ने भी सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के सम्पन्न होने पर डॉ. गौतम कुमार मेघवंशी ने ग्राम सरपंच रामदयाल गोदारा का कार्यक्रम आयोजन में सहयोग प्रदान करने की लिए आभार व्यक्त किया तथा उपस्थित ग्राम वासियों को धन्यवाद ज्ञापन किया ।

