नशामुक्त भारत के संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति की भूमिका निर्णायक : एसीजेएम संजीव कुमार
लूणकरणसर, 7 जुलाई।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार तालुका विधिक सेवा समिति के तत्वाधान में “नशे को ना कहें” विषयक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों, विधिक प्रावधानों एवं सामाजिक उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक करते हुए नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया।
मुख्य वक्ता एसीजेएम संजीव कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के नैतिक, बौद्धिक एवं शारीरिक पतन का प्रमुख कारण है। युवाओं को नशे के प्रलोभनों से स्वयं को दूर रखते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधि का उद्देश्य केवल अपराधियों को दण्डित करना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता एवं अनुशासन की स्थापना करना भी है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल सदस्य अधिकार मित्र श्रेयांस बैद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए नशीले पदार्थों से संबंधित विधिक प्रावधानों, नागरिक कर्तव्यों एवं सामाजिक दायित्वों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे तथा समाज में नशामुक्त वातावरण के निर्माण हेतु जनजागरण का वाहक बने।
इस अवसर पर अधिकार मित्र पुष्पेंद्र चौधरी ने भी विद्यार्थियों को सकारात्मक जीवन-मूल्यों को आत्मसात करने, अनुशासित जीवनशैली अपनाने तथा शिक्षा एवं संस्कारों के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य सत्यनारायण गोदारा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित विद्यार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विधिक जागरूकता शिविर विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना, विधिक समझ एवं नैतिक मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


