एमजीएसयू के 23वें स्थापना दिवस पर चार नवीन भवनों का लोकार्पण, दो महत्वपूर्ण एमओयू संपन्न

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बीकानेर (श्रेयांस बैद): महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू), बीकानेर का 23वां स्थापना दिवस एवं लोकार्पण समारोह रविवार को आयोजित किया गया। समारोह में राजस्थान के राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े, उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा तथा बीकानेर पश्चिम के विधायक जेठानंद व्यास ऑनलाइन जुड़े।

जबकि केंद्रीय विधि एवं न्याय( स्वतंत्र प्रभार) व संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल कार्यक्रम में उपस्थित हुए।

एमजीएसयू के 23वें स्थापना दिवस पर चार नवीन भवनों का लोकार्पण, दो महत्वपूर्ण एमओयू संपन्न

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी उमेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान, राजस्थान गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुआ। विश्वविद्यालय की विकास यात्रा पर आधारित वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया।

कुलगुरु प्रो. मनोज दीक्षित ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं की जानकारी दी।

शर्मा ने बताया कि समारोह के दौरान प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के अंतर्गत निर्मित परीक्षा केंद्र भवन (गुरु जम्भेश्वर भवन), केंद्रीय शोध सुविधा भवन (आचार्य तुलसी भवन), विज्ञान भवन (मां करणी भवन) तथा कला भवन (संत रामसुखदास भवन) का लोकार्पण किया गया।

साथ ही नैसकॉम आईटी-आईटीईएस सेक्टर स्किल काउंसिल तथा राजस्थान नॉलेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरकेसीएल) के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय 23 वर्ष पूर्ण कर नई उपलब्धियों की ओर अग्रसर है।

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उन्होंने पीएम-उषा योजना के तहत विकसित अधोसंरचना को विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया तथा शिक्षा के साथ संस्कार, अनुसंधान और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई।

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उन्होंने नव-निर्मित भवनों के नामकरण से जुड़े महापुरुषों के जीवन परिचय को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की भी बात कही। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ट शिक्षण एवं शोध संस्था बनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि महाराजा गंगा सिंह की दूरदर्शिता का सबसे बड़ा उदाहरण गंग नहर परियोजना है, जिसने मरुस्थलीय क्षेत्र के विकास की दिशा बदल दी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंग नहर ने इस क्षेत्र में जीवन और समृद्धि का संचार किया, उसी प्रकार विश्वविद्यालय ज्ञान, शोध और नवाचार के माध्यम से समाज को नई दिशा दे रहा है।

उन्होंने नवस्थापित भवनों को प्रदेश की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताते हुए युवाओं से शिक्षा, कौशल और नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

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उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने उच्च शिक्षा संस्थानों को नवाचार एवं कौशल विकास का केंद्र बनाने पर बल देते हुए विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव यशपाल आहूजा ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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