ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय न करें ये 4 बड़ी गलतियां, जानें सभी जरूरी डेडलाइन
नई दिल्ली: वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार सही जानकारी के साथ समय पर ITR दाखिल करना न केवल कानूनी रूप से आवश्यक है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की कर संबंधी परेशानी से बचने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
आयकर विभाग के उन्नत डेटा-मैचिंग सिस्टम के चलते अब करदाताओं द्वारा दी गई जानकारी का विभिन्न स्रोतों से मिलान किया जाता है। ऐसे में छोटी गलती भी नोटिस का कारण बन सकती है।
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जानिए ITR दाखिल करने की महत्वपूर्ण अंतिम तिथियां
करदाताओं को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना चाहिए।
- 31 जुलाई 2026: वेतनभोगी कर्मचारियों और व्यक्तिगत करदाताओं (ITR-1 और ITR-2) के लिए।
- 31 अगस्त 2026: गैर-ऑडिट वाले व्यवसायियों और फ्रीलांसरों (ITR-3 और ITR-4) के लिए।
- 31 अक्टूबर 2026: ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं और कंपनियों के लिए।
- 31 दिसंबर 2026: विलंबित (Belated) रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि। इसमें ₹1,000 से ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है।
नई टैक्स व्यवस्था के स्लैब
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई टैक्स व्यवस्था डिफॉल्ट विकल्प के रूप में लागू है।
| आय (रुपये में) | टैक्स दर |
|---|---|
| ₹4 लाख तक | शून्य |
| ₹4 लाख से ₹8 लाख | 5% |
| ₹8 लाख से ₹12 लाख | 10% |
| ₹12 लाख से ₹16 लाख | 15% |
| ₹16 लाख से ₹20 लाख | 20% |
| ₹20 लाख से ₹24 लाख | 25% |
| ₹24 लाख से अधिक | 30% |
₹12.75 लाख तक की आय पर नहीं लगेगा टैक्स
नई टैक्स व्यवस्था के तहत धारा 87A के अंतर्गत ₹60,000 तक की टैक्स छूट उपलब्ध है। वहीं वेतनभोगी कर्मचारियों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है। इस प्रकार नौकरीपेशा व्यक्तियों की ₹12.75 लाख तक की वार्षिक आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री हो सकती है।
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ITR भरते समय इन 4 गलतियों से बचें
1. गलत ITR फॉर्म का चयन
अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनें। गलत फॉर्म भरने पर रिटर्न को डिफेक्टिव घोषित किया जा सकता है।
2. AIS और Form 26AS का मिलान न करना
रिटर्न दाखिल करने से पहले AIS और Form 26AS में दर्ज जानकारी को सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और TDS रिकॉर्ड से जरूर मिलाएं।
3. सभी आय स्रोतों की जानकारी न देना
बैंक ब्याज, डिविडेंड, किराया आय या शेयर बाजार से होने वाले लाभ को छिपाने से बचें। आयकर विभाग के पास अब अधिकांश वित्तीय लेनदेन का डेटा उपलब्ध रहता है।
4. ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें
ITR दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर आधार OTP, नेट बैंकिंग या अन्य माध्यम से ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर रिटर्न अमान्य माना जा सकता है।

समय पर रिटर्न भरना क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर और सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करने से रिफंड जल्दी मिलता है, भविष्य में लोन लेने में सुविधा होती है और आयकर विभाग की कार्रवाई से बचा जा सकता है।


