इतिहासविद डॉ. अमीनुद्दीन की स्मृति में डूंगर कॉलेज में होगा प्रथम स्मृति व्याख्यान “भारतीय संस्कृति की विविधता” पर होगा मंथन
शिष्यों प्रो. (डॉ.) सैयद इनायत अली ज़ैदी और प्रो. (डॉ.) सुनीता ज़ैदी ने बनाया निजी ट्रस्ट, शिक्षा के क्षेत्र में कर रहा है कार्य
बीकानेर (श्रेयांस बैद):इतिहासकार प्रोफेसर (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति में रविवार, 25 अक्टूबर को राजकीय डूंगर कॉलेज प्रताप सभागार में शाम 5:15 से 6:15 बजे प्रथम “डॉ. अमीनुद्दीन स्मृति व्याख्यान ” आयोजन किया जाएगा।
प्रोफेसर (डॉ.) अमीनुद्दीन चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से इतिहास विभाग के सहयोग से होने वाले इस कार्यक्रम में “अनेक परंपराएं, एक सभ्यता : भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझना” विषय पर व्याख्यान होगा।
राजकीय डूंगर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित ने बताया व्याख्यान में बेंगलुरु विश्वविद्यालय, कर्नाटक के इतिहास विभाग के प्रोफेसर (सेवानिवृत्त) एन. शेख मस्तान मुख्य वक्ता होंगे।
प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित करेंगे। कार्यक्रम में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व में प्रो-वाइस चांसलर और डीन प्रो. (डॉ.) सैयद इनायत अली ज़ैदी और प्रो. (डॉ.) सुनीता ज़ैदी शामिल होंगे ।
शिष्यों ने गुरु की स्मृति में बनाया ट्रस्ट
प्रो. (डॉ.) अमीनुद्दीन की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने और उनके शैक्षणिक योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से उनके शिष्य रहे प्रो. (डॉ.) सैयद इनायत अली ज़ैदी और प्रो. (डॉ.) सुनीता ज़ैदी ने एक निजी ट्रस्ट का गठन किया है। यह ट्रस्ट शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
दोनों शिक्षाविद् विश्वविख्यात जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में प्रो-वाइस चांसलर और डीन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त, विदेशों में भी अपनी शैक्षणिक सेवाओं के माध्यम से दोनों ने भारत का नाम रोशन किया है। उन्हीं के प्रयासों से इस स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
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ट्रस्ट के सदस्य नलिन बुधवार ने बताया कि डॉ. अमीनुद्दीन की स्मृति में पहला कार्यक्रम बीकानेर के राजकीय डूंगर कॉलेज में आयोजित किया जा रहा है। यह वही महाविद्यालय है, जहां डॉ. अमीनुद्दीन ने इतिहास विषय में सहायक प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की थीं।
उन्होंने इसी कॉलेज के इतिहास विभाग में वर्षों तक सेवाएं दीं और विभागाध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण योगदान किया। उनके शैक्षणिक एवं अकादमिक कार्यों ने कॉलेज और इतिहास विभाग को देशभर में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
आगे भी आयोजित होंगी व्याख्यानमालाएं
नलिन बुधवार ने बताया कि डॉ. अमीनुद्दीन की स्मृति और उनके शैक्षणिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जाता रहेगा।
इन आयोजनों के माध्यम से शिक्षा, इतिहास, भारतीय संस्कृति और सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित किया जाएगा।
डॉ. अमीनुद्दीन का शैक्षणिक योगदान
प्रोफेसर (डॉ.) अमीनुद्दीन का जन्म 22 दिसंबर 1931 को हुआ था। उन्होंने राजस्थान के अजमेर में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने के बाद शिक्षण क्षेत्र में प्रवेश किया। वर्ष 1966 में वे राजकीय डूंगर कॉलेज, बीकानेर में व्याख्याता (सहायक प्रोफेसर) के रूप में नियुक्त हुए।

दिसंबर 1989 में सेवानिवृत्ति तक उन्होंने इस महाविद्यालय में अध्यापन किया। उनके शैक्षणिक योगदान की स्मृति में आयोजित यह व्याख्यान उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ ही ज्ञान, शिक्षा और सांस्कृतिक संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
इतिहासविद डॉ. अमीनुद्दीन की स्मृति में डूंगर कॉलेज में होगा प्रथम स्मृति व्याख्यान “भारतीय संस्कृति की विविधता” पर होगा मंथन

