भक्तामर अनुभूति : आत्मशक्ति की एक दिव्य यात्रा का भव्य आयोजन
भारत जैन महामंडल, महिला विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में आध्यात्मिकता, विज्ञान और दैनिक जीवन का हुआ अद्भुत संगम
मुंबई : भारत जैन महामंडल के महिला विभाग द्वारा ‘भक्तामर अनुभूति – आत्मशक्ति की एक दिव्य यात्रा’ कार्यशाला का आयोजन कांदिवली स्थित तेरापंथ भवन में साध्वीश्री विद्यावतीजी एवं साध्वीवृंद के सानिध्य में किया गया। कार्यशाला में आध्यात्मिकता, विज्ञान और दैनिक जीवन में मंत्रों के महत्व को सरलता से समझाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने नमस्कार महामंत्र के साथ मंगल शुरुआत की।
महिला विभाग की अध्यक्षा श्रीमती सी.ए. तरुणा बोहरा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। यह कार्यशाला सिर्फ भक्तामर को सुनने के लिए नहीं, अपितु इस भौतिक युग में अनुभव और आत्मसात करने के लिए है।
भारत जैन महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ख्यालीलालजी तातेड़ ने कार्यक्रम को अद्भुत एवं ऊर्जावान बताते हुए कहा कि महिला विभाग द्वारा इस तरह का आयोजन पहली बार किया गया है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने की प्रेरणा दी।
मुख्य वक्ता डॉ. सोनल जैन जायसवाल ने मंत्रों की महत्ता बताते हुए कहा कि मंत्र हमें ऊर्जा से जोड़ते हैं, मन को शांत करते हैं और परमात्मा से जुड़ने का सरल माध्यम हैं। मंत्र माँ की तरह हमारा संरक्षण करते हैं।
उन्होंने मंत्रों के जप का सही समय, विधि, स्थान और संख्या समझाते हुए भक्तामर स्तोत्र की विशेष महत्ता बताई। उन्होंने श्वास के साथ लय जोड़कर तथा बीज मंत्र एवं ऋद्धि मंत्र के जप के बारे में बताया।
साध्वीश्री प्रियंवदाजी ने आचार्य मानतुंगजी को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन संघर्षों के बीच भी अपना धैर्य नहीं खोया। कहानी के माध्यम से उन्होंने समझाया कि समस्याओं से उलझने के बजाय उन्हें सुलझाने का प्रयास करना चाहिए। भक्त के हृदय में भक्ति और आस्था का होना आवश्यक है। भक्तामर स्तोत्र का प्रतिदिन स्मरण घर के वातावरण को पवित्र बनाता है।
मुंबई सभा के अध्यक्ष श्री सुरेंद्रजी कोठारी ने कहा कि भारत जैन महामंडल पिछले छह महीनों में अनेक अच्छे कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जोड़ने के निरंतर प्रयास कर रहा है।
उन्होंने इस आयोजन को रोचक एवं सराहनीय बताया। महामंत्री श्री बाबूलालजी बाफना ने कहा कि नवरात्रि के पावन दिनों में महिला विभाग द्वारा आयोजित ऐसा साधनामय कार्यक्रम आत्मज्ञान की प्रेरणा देता है।
भक्तामर स्तोत्र की विशेषज्ञ डॉ. मंजूजी जैन, जिन्हें ‘भक्तामर की माँ’ के नाम से जाना जाता है, ने भक्तामर स्तोत्र पर अपने शोध एवं पीएच.डी. से जुड़े अनुभव साझा किए।
उन्होंने प्रत्येक पद्य की महिमा, उसके जप की विधि तथा विभिन्न परिस्थितियों में उसके उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति के साथ नियमित जप-साधना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अनेक प्रेरक प्रसंग सुनाए, जिनमें गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के अनुभव भी शामिल थे।
इसके पश्चात स्वर कोकिला श्रीमती मीनाक्षी भूतोड़िया ने अपनी सुरीली आवाज और अनूठी शैली में भक्तामर स्तोत्र की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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भारत जैन महामंडल की महामंत्री श्रीमती आशा बडाला ने सभी अतिथियों एवं संपूर्ण जैन समाज से पधारे गणमान्य महानुभावों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन श्रीमती सुमनजी चपलोत ने किया।
कार्यक्रम में विशेष सहयोग श्रीमती दर्शना महावीरजी डूंगरवाल का मिला।
इस अवसर पर युवा विभाग के अध्यक्ष श्री भूपेशजी, कोषाध्यक्ष श्री सुरेशजी आंचलिया, श्री शांतिलालजी बरमेचा, श्री नवरत्नजी गन्ना, किशोरजी खाब्या सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शीतल सांखला, पिंकी सांखला, सीमा सिंघवी, अनिता डांगी, लतिका डागलिया, मधु मेहता, जमना धाकड़, निर्मला कोठारी, रेखा चोरडिया, रेखा खरवड़, केसर दूगड़, कांता डूंगरवाल, मोना नौलखा तथा संपूर्ण टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
भक्तामर अनुभूति : आत्मशक्ति की एक दिव्य यात्रा का भव्य आयोजन

