किडनी फेलियर केस में नया मोड़, जांच टीम ने डॉक्टरों को दी क्लीन चिट के संकेत
बीकानेर के प्रिंस बिजय सिंह मेमोरियल (पीबीएम) अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले में डॉक्टरों को बड़ी राहत मिलती नजर आ रही है। जोधपुर से पहुंची छह सदस्यीय विशेषज्ञ जांच टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है और प्रारंभिक स्तर पर इलाज में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही सामने नहीं आने की बात कही है।
मंगलवार को बीकानेर पहुंची टीम ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, ऑपरेशन थिएटर (ओटी) और आईसीयू का निरीक्षण किया। साथ ही भर्ती प्रसूताओं से बातचीत कर उनके उपचार और स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। जांच के दौरान डिलीवरी और उपचार प्रक्रिया की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने बताया कि जांच टीम अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। टीम के सदस्यों ने अस्पताल में प्रसूताओं के इलाज और डिलीवरी से जुड़ी व्यवस्थाओं को संतोषजनक माना है तथा अब तक किसी प्रकार की लापरवाही के संकेत नहीं मिले हैं।
हालांकि प्रसूताओं को लगाए गए इंजेक्शनों की गुणवत्ता को लेकर जांच अभी जारी है। ड्रग कंट्रोलर विभाग संबंधित इंजेक्शन के सैंपलों की जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट अगले पांच दिनों में आने की संभावना है।
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इधर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली कई आवश्यक दवाओं की आपूर्ति पिछले कुछ समय से प्रभावित है। पीबीएम अस्पताल सहित जिले के विभिन्न पीएचसी, सीएचसी और सेटेलाइट अस्पतालों में कई दवाओं की कमी के चलते स्थानीय स्तर पर खरीदारी करनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की भी इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर खरीद की गई। पिछले छह महीनों में करीब 25 हजार वायल खरीदे गए। जहां सरकारी खरीद में एक इंजेक्शन की कीमत लगभग 4 से 5 रुपये होती है, वहीं स्थानीय बाजार से इन्हें करीब 18 रुपये प्रति वायल की दर से खरीदा गया। इस कारण खरीद लागत में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी हुई।

अब संबंधित बैच की गुणवत्ता और आपूर्ति प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है। इसके लिए निर्माता कंपनी से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

