मेडिकल पैकेट के ₹415 देने के बावजूद उपभोक्ता को मिल रही कम मात्रा
मरीजों से जुड़े उत्पाद में 6 प्रतिशत तक कम मात्रा का खुलासा
बीकानेर (श्रेयांस बैद): उपभोक्ता मामले मंत्री सुमित गोदारा के निर्देशानुसार उपभोक्ता हितों की सुरक्षा एवं मेडिकल तथा हेल्थकेयर उत्पादों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक मापविज्ञान प्रकोष्ठ द्वारा विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया।
इसी अभियान के तहत विधिक माप विज्ञान अधिकारी श्री दीपक पूनिया के नेतृत्व में अंबेडकर सर्किल के पास स्थित एम एम सर्जिकल्स ब्रांड साइन क्यूर एवं गुप्ता एजेंसी (क्यूरेन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड) ब्रांड बटरफ्लाई का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान Absorbent Cotton Wool, Stretched Band, Syringe, Cannula, Bandage सहित विभिन्न मेडिकल/हेल्थकेयर उत्पादों की जांच की गई।

₹415 पूरे, लेकिन 500 ग्राम की जगह औसतन 475 ग्राम
जांच के दौरान 500 ग्राम घोषित Absorbent Cotton Wool, जिसका MRP ₹415/- है, की 500 ग्राम मात्रा की जांच की गई। जांच में इसकी औसत मात्रा मात्र 475 ग्राम पाई गई।
अर्थात प्रत्येक पैकेट में औसतन 25 ग्राम से ज्यादा की कमी, यानी घोषित मात्रा से 6 प्रतिशत तक की कम मात्रा पाई गई।
₹415 के MRP के आधार पर यह कमी लगभग ₹20.75 प्रति पैकेट के उत्पाद मूल्य के बराबर है।
यानी उपभोक्ता से पूरी ₹230 की कीमत ली जा रही थी जबकि उसे घोषित 500 ग्राम की तुलना में औसतन 25 ग्राम से ज्यादा तक कम उत्पाद मिल रहा था।
मेडिकल उत्पादों में ऐसी कमी सीधे उस उपभोक्ता को प्रभावित करती है जो पैकेज पर अंकित मात्रा पर भरोसा करके उत्पाद खरीदता है , विशेषकर तब, जब उत्पाद मरीज की आवश्यकता से जुड़ा हो।
मात्रा के साथ पैकेजिंग में भी अनियमितताएं—
निरीक्षण के दौरान विधिक मापविज्ञान नियमों के अंतर्गत आवश्यक घोषणाएं नहीं पाये जाने पर फर्मों को विभाग द्वारा नोटिस भी जारी किया गया है।
उल्लंघनों के संबंध में कुल 40000 का जुर्माना लगाया गया। साथ ही कमियों के सुधार हेतु इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किया गया तथा सुधार होने तक संबंधित उत्पाद की बिक्री नहीं करने के निर्देश दिए गए।
मेडिकल एवं हेल्थकेयर उत्पादों की खरीद में उपभोक्ता अक्सर पैकेज पर घोषित मात्रा और विवरण पर निर्भर करता है। इसलिए पूरी कीमत लेकर घोषित मात्रा से कम उत्पाद उपलब्ध कराना उपभोक्ता के विश्वास और आर्थिक हितों दोनों को प्रभावित करता है।
मेडिकल उत्पादों के मामले में यह विषय और भी संवेदनशील है, क्योंकि इन्हें मरीज एवं उनके परिजन अक्सर तत्काल आवश्यकता और उपचार की स्थिति में खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता पैकेज पर अंकित मात्रा को सही मानकर खरीद करता है और वास्तविक मात्रा में कमी का पता लगाना उसके लिए सामान्यतः संभव नहीं होता।
विधिक मापविज्ञान प्रकोष्ठ द्वारा मेडिकल एवं हेल्थकेयर सेक्टर में पैकेज्ड उत्पादों की घोषित बनाम वास्तविक मात्रा, एमआरपी, अनिवार्य घोषणाओं, पैकर/निर्माता विवरण तथा माप-तौल उपकरणों की जांच का अभियान लगातार जारी रहेगा

स्पष्ट संदेश—मरीज की आवश्यकता और उपभोक्ता के भरोसे का लाभ उठाकर मात्रा में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी।
मेडिकल पैकेट के ₹415 देने के बावजूद उपभोक्ता को मिल रही कम मात्रा

