ऊंटनी के दूध पर शोध को मिली बड़ी उपलब्धि, डॉ. राजकुमार बेरवाल को भारत सरकार से पेटेंट
ऊंटनी के दूध से बने दुग्ध उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और सेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीक पर हुआ महत्वपूर्ण शोध
बीकानेर (श्रेयांस बैद):राजस्थान के लिए गौरव की बात है कि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अधिकारी एवं स्वदेशी दुग्ध उत्पाद परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. राजकुमार बेरवाल के ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध को भारत सरकार की ओर से पेटेंट प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि ऊंटनी के दूध एवं उससे तैयार होने वाले मूल्यवर्धित दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डॉ. बेरवाल के अनुसार ऊंट राजस्थान का राज्य पशु है। देश में ऊंटों की संख्या करीब चार लाख है तथा भारत में ऊंटों की नौ पंजीकृत नस्लें हैं। इनमें राजस्थान की बीकानेरी, जैसलमेरी, जालोरी, मारवाड़ी एवं मेवाती प्रमुख नस्लें हैं।
देश के कुल ऊंटों में लगभग 85 प्रतिशत ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं, ऐसे में ऊंटनी के दूध पर वैज्ञानिक शोध का राजस्थान के पशुपालकों और दुग्ध क्षेत्र से विशेष महत्व जुड़ा हुआ है।
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शोध में प्रोटीन पर किया गया विशेष प्रयोग
शोध के दौरान ऊंटनी के दूध में मौजूद कैसीन प्रोटीन पर विशेष रूप से कार्य किया गया। ऊंटनी के दूध में लगभग 3 से 5 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिसमें कैसीन प्रमुख प्रोटीन है। शोधकर्ताओं के अनुसार इसमें बीटा-केसीन प्रोटीन की उपस्थिति उल्लेखनीय है, जो हाइड्रोलिसिस के बाद सक्रिय पेप्टाइड्स में परिवर्तित हो सकता है।
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डॉ. बेरवाल ने बताया कि शोध में कैसीन प्रोटीन पाउडर हाइड्रोलिसेट को अल्ट्रासोनिक किरणों एवं विभिन्न एंजाइमों की सहायता से हाइड्रोलाइज कर तैयार किया गया। इसके बाद इस तकनीक का उपयोग विभिन्न दुग्ध उत्पादों में वैल्यू एडिशन के लिए किया गया।
उत्पादों की गुणवत्ता और सेल्फ लाइफ में हुआ सुधार
शोध के परिणामों में सामने आया कि विकसित तकनीक के उपयोग से तैयार किए गए दुग्ध उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, न्यूट्रिटिव वैल्यू और यील्ड में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। साथ ही शोध के अनुसार इन उत्पादों की सेल्फ लाइफ भी लगभग दोगुनी हुई।
ऊंटनी के दूध में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों के कारण इसे मानव पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि किसी बीमारी के उपचार या उससे छुटकारे के संबंध में चिकित्सकीय दावे करने के बजाय इसके पोषण एवं संभावित जैव-सक्रिय गुणों पर वैज्ञानिक अध्ययन महत्वपूर्ण हैं।

भारत सरकार द्वारा इस शोध को पेटेंट प्रदान किया जाना राजस्थान के वैज्ञानिक अनुसंधान, ऊंटपालन एवं स्वदेशी दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे भविष्य में ऊंटनी के दूध से नए मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित करने तथा ऊंटपालकों को बेहतर आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
ऊंटनी के दूध पर शोध को मिली बड़ी उपलब्धि, डॉ. राजकुमार बेरवाल को भारत सरकार से पेटेंट


