आत्म अस्तित्व में जागी व्रत की चेतना, दक्षिण मुंबई में मनाया अणुव्रत चेतना दिवस
मुंबई: पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर आज अनुव्रत चेतना दिवस के रूप में धर्माराधना, आत्मचिंतन एवं संयम की प्रेरणा से जुड़ा आयोजन महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल, कालबादेवी में हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर व्रत एवं संयम के प्रति अपनी चेतना को जागृत किया।
अनुव्रत जीवन को मर्यादित, संयमित और नैतिक बनाने की प्रेरणा देता है। छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन, सदाचार और आत्मनियंत्रण को विकसित कर सकता है। अनुव्रत चेतना दिवस का उद्देश्य व्यक्ति को बाहरी आकर्षणों से ऊपर उठकर अपने आत्म अस्तित्व और आंतरिक शक्ति के प्रति जागरूक करना रहा।
इस अवसर पर शासनश्री साध्वीश्री कंचनप्रभाजी एवं शासनश्री साध्वीश्री मंजूरेखाजी आदि साध्वीवृंद का सान्निध्य प्राप्त हुआ। साध्वीश्री ने पर्युषण महापर्व की साधना को जीवन में उतारने तथा व्रत एवं संयम के माध्यम से आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान की।
शासन श्री साध्वीश्री कंचनप्रभा जी ने कहा— श्रावक-श्राविका के जीवन का आदर्श ही संयम की सार्थकता, इसे समझे बिना व्रत की, यानि त्याग की भावना जागृत नहीं होती। जहां त्याग है वहां आत्म-तोष है, शक्ति है, शान्ति है।
शासन श्री साध्वीश्री मंजुरेखा जी ने कहा— भगवान महावीर, दो धर्मों को प्रतिष्ठित किया— आगार धर्म और अनगार धर्म। महाव्रती और अणुव्रती दोनों को भगवान महावीर ने एक दूसरे की पूर्णता बताया। इसी पूर्णता के साथ जैन शासन की प्रभावना हो रही है।
अनादि अनन्त काल की परम्परा में, जैन शासन की प्रभावना में त्याग और व्रत को महत्त्व मिला है, भोग को नहीं। व्रत के द्वारा जीवन को बदला जा सकता है। साध्वीश्री निर्भयप्रभा जी ने व्रत जीवन में क्यों आवश्यक है, सुन्दर प्रस्तुति दी।
श्रीडूंगरगढ़ नगर पालिका चुनाव: किसका बनेगा बोर्ड?
तेरापंथ किशोर मण्डल दक्षिण मुंबई के मंगलाचरण से कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ। “जुआ कितना खराब” इस पर किशोर मण्डल की सुन्दर प्रस्तुति रही। साध्वी वृन्द ने सुन्दर गीत प्रस्तुत कर सभी को व्रतमय बना दिया।
शासन श्री साध्वीश्री कंचनप्रभा जी ने केवल ज्ञान की महिमा को प्रस्तुत करते हुए मृगावती साध्वी के साथ घटित आश्चर्य का वर्णन किया।
शासन श्री साध्वीश्री मंजुरेखा जी ने भगवान पार्श्व के सातवें जन्म को व्याख्यायित करते हुए पूरी जनचेतना को भगवान पार्श्व, त्याग और संथारे को जोड़ जनता में त्याग के प्रति उत्साह जगाया। छोटे-छोटे नियम-व्रत से आत्मा निर्मल बने। संयोजन किया शासन श्री साध्वीश्री मंजुरेखा जी ने।
कार्यक्रम में आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, तेरापंथ युवक परिषद, तेरापंथ महिला मंडल, तेरापंथ किशोर मंडल एवं अणुव्रत समिति दक्षिण मुंबई सहित सभी संबंधित संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्य एवं श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।
सभी ने पर्युषण महापर्व की आराधना में सहभागी बनकर व्रत, संयम और आत्मचिंतन की भावना को सुदृढ़ किया।

पर्युषण महापर्व की इस साधनामय यात्रा में दक्षिण मुंबई का श्रावक समाज निरंतर धर्म, संयम और आत्मचिंतन की ओर अग्रसर हो रहा है। अनुव्रत चेतना दिवस ने इसी आध्यात्मिक यात्रा को और अधिक सार्थक बनाने का संदेश दिया। यह जानकारी सभा प्रचार मंत्री नितेश धाकड़ एवं तेयुप उपाध्यक्ष दर्शन डागलिया ने दी।
आत्म अस्तित्व में जागी व्रत की चेतना, दक्षिण मुंबई में मनाया अणुव्रत चेतना दिवस

