गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि के संरक्षण को लेकर बैद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि के संरक्षण को लेकर बैद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि के संरक्षण को लेकर बैद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुधन संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन एवं पारंपरिक जल-संरक्षण व्यवस्था में गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

ये भूमि केवल राजस्व अभिलेखों की संपत्ति नहीं, बल्कि सदियों से ग्राम समुदाय, पशुधन एवं प्राकृतिक पारिस्थितिकी के संरक्षण का आधार रही हैं भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के मानद प्रतिनिधि श्रेयांस बैद ने केंद्रीय राज्य मंत्री पंचायती राज विभाग एस पी बघेल को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि

वर्तमान में प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में ऐसी सार्वजनिक एवं सामुदायिक भूमि पर अवैध कब्जे,अतिक्रमण एवं अनधिकृत निर्माण होने के कारण इनके मूल स्वरूप एवं उपयोगिता पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इससे पशुओं के लिए चरागाह क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं तथा पारंपरिक जलस्रोत, जैव-विविधता और पर्यावरणीय संतुलन भी प्रभावित हो रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही में गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने एवं उसके संरक्षण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए इन निर्देशों की प्रभावी एवं समयबद्ध पालना सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि सरकारी आदेश केवल कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर वास्तविक रूप से लागू हो सकें।

नगरीय निकाय आम चुनाव: जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण आयोजित

पंचायती राज विभाग के स्तर से राजस्थान सरकार एवं संबंधित जिला प्रशासन/पंचायती राज संस्थाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करवाने प्रदेश की समस्त गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि का राजस्व अभिलेखों एवं मौके के अनुसार विशेष सर्वेक्षण करवाया जाने सहित ऐसी भूमि पर किए गए अवैध कब्जों एवं अतिक्रमणों को चिह्नित कर समयबद्ध अभियान चलाकर हटाया जाए।

राजस्थान सरकार द्वारा हाल ही जारी किए गए अतिक्रमण हटाने संबंधी निर्देशों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करवाई जाने के साथ ही

ग्राम पंचायत स्तर पर ऐसी भूमि का सीमांकन एवं चारदीवारी/सीमा-चिह्नांकन की व्यवस्था की जाए, जहां आवश्यक हो भविष्य में गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का नया अतिक्रमण न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए।

प्रत्येक ग्राम पंचायत में ऐसी भूमि का अभिलेख तैयार कर उसकी निगरानी एवं संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर व्यवस्था विकसित की जाए।

अतिक्रमण हटाने के पश्चात भूमि का उपयोग पुनः पशु चराई, जल संरक्षण, हरित क्षेत्र एवं पर्यावरण संरक्षण के मूल उद्देश्य के अनुरूप सुनिश्चित किया जाए।

गोचर एवं ओरण का संरक्षण सीधे तौर पर पशुधन संरक्षण, ग्रामीण आजीविका, पर्यावरण सुरक्षा एवं हमारी पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है इस संबंध में केंद्रीय स्तर से आवश्यक मार्गदर्शन एवं राज्य सरकार के साथ समन्वय स्थापित होने से प्रदेशभर में एक प्रभावी संरक्षण अभियान को गति मिल सकती है।

गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि के संरक्षण को लेकर बैद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

जनहित एवं पशुहित में इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग एवं राजस्थान सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करवाने तथा गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त एवं संरक्षित रखने हेतु राज्यव्यापी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करवाने की मांग की गई है।

गोचर, ओरण, पायतन एवं जोहड़ भूमि के संरक्षण को लेकर बैद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

होम
बहुभाषी
E-Paper
मेनू
वेरिफिकेशन
संपर्क करें