प्रकृति को समर्पित ‘धरती पुत्र’ इन्द्र चन्द सोनी की अनूठी पहल
बंगाल-भूटान सीमा से दुर्लभ पौधे लाकर श्रीडूंगरगढ़ में किया पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर (तोलाराम मारू): प्रकृति और पर्यावरण के प्रति समर्पण की मिसाल पेश कर रहे श्रीडूंगरगढ़ निवासी एवं वर्तमान में पश्चिम बंगाल के जयगांव में प्रवासरत पर्यावरण प्रेमी इन्द्र चन्द सोनी माहेश्वरी ने एक बार फिर अनूठी पहल की है।
वे भारत-भूटान सीमा क्षेत्र से बैजन्ती सहित दुर्लभ पौधे अपने साथ लेकर श्रीडूंगरगढ़ पहुंचे और यहां पौधरोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
माहेश्वरी समाज, जयगांव द्वारा ‘धरती पुत्र’ की उपाधि से सम्मानित इन्द्र चन्द सोनी पेड़-पौधों को ईश्वर का स्वरूप मानते हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार हम अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल करते हैं, उसी भावना से पौधों की भी देखभाल करनी चाहिए। उनका संदेश है कि हर व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए।
लगभग 25 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के कार्य में जुटे इन्द्र चन्द सोनी जब भी अपने पैतृक स्थान श्रीडूंगरगढ़ आते हैं, तो यहां से चार-पांच पौधे अपने साथ जयगांव ले जाते हैं। इसी प्रकार वापसी के दौरान वे बंगाल एवं भारत-भूटान सीमा क्षेत्र से विभिन्न पौधे राजस्थान लेकर आते हैं। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों पौधे लगाए हैं।
उन्होंने राजस्थान की प्राकृतिक धरोहर गूंदी, लेसवा और खेजड़ी जैसे पौधों को भूटान सीमा क्षेत्र में भी रोपित किया है। उनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की वनस्पतियों को संरक्षित करना और अधिक से अधिक लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करना है।
बैजन्ती का पौधा और माला भेंट
इस बार इन्द्र चन्द सोनी ने पर्यावरण प्रेमी तोलाराम मारू को बैजन्ती का पौधा तथा उसके मनकों से बनी माला स्वास्थ्य एवं मंगलकामना के साथ भेंट की। वहीं श्रीडूंगरगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी को भी बैजन्ती का पौधा एवं बैजन्ती के मनकों की माला भेंट की गई। इस अवसर पर समाजसेवी दीनदयाल करनाणी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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इन्द्र चन्द सोनी ने बताया कि बैजन्ती के मनकों से बनी माला का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े धार्मिक प्रसंगों में भी बैजन्ती माला का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार, इसे सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है।
उन्होंने बताया कि बैजन्ती के पौधे को नमी वाले स्थान पर रखना उचित रहता है तथा वर्षा का पानी उपलब्ध हो तो वह पौधे के लिए लाभकारी होता है।
सनातन मुक्ति धाम में भी किया पौधरोपण
इन्द्र चन्द सोनी, पुत्र स्वर्गीय रामेश्वर लाल सोनी, कालूबास, श्रीडूंगरगढ़ ने अपने साथ लाए पौधों में से पारिजात और बिल्वपत्र के पौधे सनातन मुक्ति धाम, श्रीडूंगरगढ़ में भी रोपित किए।
उनका कहना है कि जीवन का उद्देश्य केवल धन कमाना नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और प्रकृति के लिए भी कुछ करना चाहिए। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन एक नई सोच के साथ उठे और ऐसे कार्य करे जिन्हें समाज लंबे समय तक याद रखे।
उन्होंने कहा कि बढ़ती भूमंडलीय उष्णता और पर्यावरणीय संकट को कम करने की दिशा में पौधरोपण एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए।
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तोलाराम मारू का भी पर्यावरण संरक्षण में योगदान
इससे पहले भी इन्द्र चन्द सोनी द्वारा एक समारोह में पारिजात/कल्पवृक्ष का पौधा जीव दया गौशाला के लिए पर्यावरण प्रेमी तोलाराम मारू को भेंट किया गया था। इस अवसर पर पर्यावरण क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए तोलाराम मारू का सम्मान भी किया गया।
तोलाराम मारू ने नगर कल्याण समिति, श्रीडूंगरगढ़ के मंत्री पद पर रहते हुए 250 खजूर के पौधे लगाए थे। नगर कल्याण समिति के नीम नगर में भी सैकड़ों नीम के पौधे लगाए गए, जो अब बड़े वृक्षों का रूप ले चुके हैं।
खजूर अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन राजस्थान के तत्कालीन मंत्री खेमाराम मेघवाल द्वारा किया गया था। वहीं महावीर इंटरनेशनल, श्रीडूंगरगढ़ के सचिव रहते हुए भगवान महावीर के जन्म कल्याणक वर्ष के अवसर पर 100 वट वृक्ष के पौधे वितरित किए गए।

नगरपालिका श्रीडूंगरगढ़ के पार्षद रहते हुए भी शिव धोरा एवं श्याम धोरा क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर पौधरोपण किया गया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए समय-समय पर तोलाराम मारू को विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया गया है।
इन्द्र चन्द सोनी और तोलाराम मारू जैसे पर्यावरण प्रेमियों की पहल यह संदेश देती है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर एक पौधे की जिम्मेदारी लेकर उसकी देखभाल करे, तो प्रकृति संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।


