आसाराम की आजीवन कारावास की सजा रहेगी बरकरार, सेवादार हुए बरी
जोधपुरः आसाराम उर्फ आसुमल की यौन शोषण मामले में प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर अपील पर बुधवार को फैसला आया। हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार मोंगा और योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने अपने फैसले में आसाराम को पूरी तरह से आरोप मुक्त नहीं किया है।
उनकी सजा खत्म करने की अपील खारिज हुई है, लेकिन पॉक्सो एक्ट की गैर जमानती अपराध, आईपीसी की गैंग रेप और षड्यंत्र कर अपराध करने से जुड़ी धाराओं में दोषी नहीं माना है। खंडपीठ ने भारतीय दंड संहिता की दुष्कर्म, पॉक्सो की यौन शोषण और जेजे एक्ट सहित अन्य धाराओं को लेकर लोअर कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया है, यानी सजा बरकरार रहेगी।
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खंडपीठ ने आसाराम के सेवादार शरतचंद्र उर्फ शिव और शिल्पी को पूरी तरह से आरोप मुक्त कर दिया है। इस मामले में पीड़िता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने बताया कि कोर्ट ने सजा पर रोक नहीं लगाई है।

आजीवन कारावास की सजा बरकरार है, राहत जरूर दी है। सोलंकी ने बताया कि बरी किए गए आरोपियों के आदेश के खिलाफ पीड़िता से बात कर हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इस फैसले के बाद आसाराम को अब जेल में सरेंडर करना होगा।

