निराश्रित पशुओं से जनहानि, मिलावटी पशुआहार और ऑक्सीटोसिन पर कार्रवाई की मांग, मुख्य सचिव को भेजा पत्र
बल्लभगढ़:भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के मानद प्रतिनिधि श्रेयांस बैद ने राजस्थान के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में गौपालन विभाग की कार्यप्रणाली पर एतराज जताया है उन्होंने बताया कि राजस्थान में पशुधन संरक्षण, गौवंश कल्याण एवं जनसुरक्षा से जुड़े अनेक गंभीर विषय लंबे समय से प्रभावी कार्रवाई के अभाव में उपेक्षित हैं।
हाल ही में जैसलमेर, जालोर, श्रीगंगानगर एवं लूणकरणसर सहित विभिन्न क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं के कारण हुई दुर्घटनाओं में लोगों की मृत्यु होने के समाचार सामने आए हैं। वहीं सड़कों पर गौवंश की मृत्यु की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं, किंतु इन मामलों में अपेक्षित प्रशासनिक संवेदनशीलता एवं जवाबदेही दिखाई नहीं देती।
दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि गौपालन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा प्रतीत होता है। ऐसा महसूस होता है कि अफसरशाही वातानुकूलित कमरों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर गौवंश, पशुपालक एवं आमजन गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
विभाग का मूल उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पशुधन की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं संरक्षण के लिए प्रभावी निगरानी भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
हाल ही में प्रकाशित समाचारों में यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि बाजार में मिलावटी एवं निम्न गुणवत्ता का पशुआहार खुलेआम बेचा जा रहा है। दैनिक भास्कर के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित रिपोर्ट में भी पशुआहार में मिलावट एवं उसके दुष्प्रभावों को प्रमुखता से उजागर किया गया है।
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ऐसे पशुआहार के सेवन से पशुओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं तथा दूध एवं अन्य पशु उत्पादों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ रही है।
पशुआहार में मिलावट की रोकथाम एवं गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा समय-समय पर दिशा-निर्देश एवं मानक जारी किए गए हैं, किन्तु प्रदेश में मिलावटी पशुआहार की खुलेआम बिक्री यह प्रश्न खड़ा करती है कि इन निर्देशों की वास्तविक पालना कहां हो रही है।
यदि नियमित निरीक्षण, नमूना परीक्षण एवं दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही होती तो पशुआहार में मिलावट का इतना बड़ा नेटवर्क विकसित नहीं हो पाता। यह स्थिति न केवल पशुपालकों के आर्थिक हितों को प्रभावित कर रही है बल्कि पशुधन एवं मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
इसी प्रकार बाजार में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन के अवैध उपयोग एवं बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुओं में ऑक्सीटोसिन का अवैध उपयोग न केवल पशुओं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है कि ऐसे मामलों की रोकथाम में गौपालन विभाग द्वारा कितनी निगरानी, जांच एवं प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। यदि प्रतिबंधित दवाएं खुले बाजार में उपलब्ध हैं, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त प्रदेश में संचालित अनेक गौशालाओं की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है। सरकारी अनुदान प्राप्त करने के बावजूद कई गौशालाओं में गौवंश के रखरखाव, चिकित्सा, चारा एवं पानी की व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं।
कई स्थानों पर गौवंश की मृत्यु, पशुओं की वास्तविक संख्या और अनुदान राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में गौशालाओं का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण, वित्तीय ऑडिट एवं भौतिक सत्यापन कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
विशेष रूप से लूणकरणसर क्षेत्र में बड़ी संख्या में निराश्रित नंदी (सांड) खुले में विचरण करते हैं, जिससे दुर्घटनाओं एवं जनहानि की आशंका बनी रहती है।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए लूणकरणसर में शीघ्र नंदीशाला की स्थापना की जानी आवश्यक है, जिससे निराश्रित नंदियों को सुरक्षित आश्रय, चारा, पानी एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। बैद ने मुख्य सचिव को प्रेषित सुझाव में जैसलमेर, जालोर, श्रीगंगानगर एवं लूणकरणसर में निराश्रित पशुओं के कारण हुई जनहानि एवं दुर्घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।
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गौवंश की मृत्यु के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।गौपालन विभाग की कार्यप्रणाली एवं निगरानी तंत्र की समीक्षा कर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
बाजार में बिक रहे पशुआहार की व्यापक जांच कर मिलावटी एवं निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पशुआहार निर्माण एवं विक्रय इकाइयों का नियमित निरीक्षण एवं गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य किया जाए।प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन की अवैध बिक्री एवं उपयोग के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
ऑक्सीटोसिन नियंत्रण एवं पशु स्वास्थ्य सुरक्षा के संबंध में गौपालन विभाग की भूमिका एवं कार्रवाई की समीक्षा की जाए।प्रदेश की सभी अनुदान प्राप्त एवं पंजीकृत गौशालाओं का स्वतंत्र ऑडिट, सामाजिक अंकेक्षण एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए।जिन गौशालाओं में अनियमितता, गौवंश की उपेक्षा अथवा अनुदान के दुरुपयोग के तथ्य सामने आएं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
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लूणकरणसर में शीघ्र नंदीशाला की स्थापना हेतु आवश्यक भूमि, बजट एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जाए।
निराश्रित पशुओं के संरक्षण एवं पुनर्वास हेतु राज्यव्यापी कार्ययोजना लागू की जाए।
भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा पशुआहार गुणवत्ता नियंत्रण एवं मिलावट रोकथाम संबंधी जारी दिशा-निर्देशों की राजस्थान में वास्तविक पालना की समीक्षा करवाई जाए।प्रदेशभर में पशुआहार निर्माण एवं विक्रय केंद्रों से नियमित रूप से नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच करवाई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
मिलावटी पशुआहार के निर्माण, भंडारण एवं विक्रय में लिप्त व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की जाए।प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन एवं अन्य अवैध पशु औषधियों की बिक्री रोकने हेतु विशेष राज्य स्तरीय अभियान चलाकर गौपालन विभाग, पशुपालन विभाग, औषधि नियंत्रण विभाग एवं जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आज आवश्यकता केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम देने वाली कार्रवाई की है। गौ संरक्षण, पशु कल्याण एवं जनसुरक्षा के विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।

यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो निराश्रित पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं, जनहानि, गौवंश की मौतों, मिलावटी पशुआहार के दुष्प्रभावों एवं प्रतिबंधित औषधियों के अवैध उपयोग जैसी समस्याएं और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती हैं।जनहित, पशुहित एवं गौहित को दृष्टिगत रखते हुए तत्काल प्रभाव से आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
निराश्रित पशुओं से जनहानि, मिलावटी पशुआहार और ऑक्सीटोसिन पर कार्रवाई की मांग, मुख्य सचिव को भेजा पत्र



