सहजन आधारित कृषि प्रणाली किसानों की आय बढ़ाने में बनेगी सहायक: डॉ. सुमंत व्यास
काजरी में नाबार्ड वित्त पोषित तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
बीकानेर (श्रेयांस बैद): जिले में सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में किया गया।
नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजूवास) के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास, नाबार्ड के डीडीएम श्री अरविंद चाहर तथा संयुक्त निदेशक बागवानी श्री प्रेमाराम ने किया।
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इस अवसर पर डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि मोरिंगा एक बहुउपयोगी एवं चमत्कारी वृक्ष है, जिसके बीज, पत्तियां, जड़ें, तना, छाल तथा लकड़ी का उपयोग स्वास्थ्य, औषधि, कृषि, पशुपालन और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। उन्होंने कहा कि सहजन आधारित कृषि प्रणाली किसानों के लिए आय एवं रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकती है।
नाबार्ड के डीडीएम श्री अरविंद चाहर ने सहजन को किसानों का सच्चा साथी बताते हुए कहा कि यह फसल आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन सकती है। वहीं संयुक्त निदेशक बागवानी श्री प्रेमाराम ने सहजन के औषधीय गुणों और इसकी खेती से भूमि की उर्वरता में होने वाले सुधार की जानकारी दी।
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परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बीरबल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों के 50 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि यह परियोजना पिछले दो वर्षों से नाबार्ड के सहयोग से काजरी, बीकानेर में संचालित की जा रही है। अब तक इसके माध्यम से 200 किसानों को दो लाख से अधिक सहजन पौधे निःशुल्क वितरित किए जा चुके हैं। काजरी प्रशासन ने इस परियोजना को जिले के किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।

कार्यक्रम के संचालन एवं आयोजन में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा, मूल सिंह गहलोत एवं डॉ. सीताराम जाट का विशेष सहयोग रहा।


