चांदावत परिवार की समस्त बहन बेटियों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा / नानी बाई के मायरे के दिव्य आयोजन का आज समापन हुआ
रिपोर्टर – मनोहर अडिचवाल ‘ देशवाल / नागोर
भागवत कथा का अन्तिम दिन पुर्ण यज्ञ आहुतियो कें साथ11 जोड़ें बेठकर यज्ञ में आहुतियाँ दी बादमे कलश लेकर चांदावत परिवार की बहन बेटियो ने मंदिर तक पंहुचाया साथ में कथा वाचक पुज्य महाराज रामनिवास अर्जन भाई वे- पुरी जी पुरी भागवत कथा टीम बहन बेटियो कें साथ मंदिर कलश पंहुचाने पहुंचे
चांदावत परिवार की समस्त बहन बेटियों द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा / नानी बाई के मायरे के दिव्य आयोजन का आज समापन हुआ। सात दिनों तक देशवाल गाँव की इस पुण्य धरा पर प्रभु नाम की ऐसी गंगा बही कि हर हृदय भक्ति से सराबोर हो गया। कहीं भजन की मधुरता थी, कहीं झांकियों की सुंदरता… और हर चेहरे पर भगवान के प्रति प्रेम और श्रद्धा दिखाई दे रही थी।
लेकिन आज मैं विशेष रूप से उन बहन-बेटियों को साधुवाद देना चाहता हूँ, जिनके संकल्प, सेवा और श्रद्धा से यह भव्य आयोजन संभव हो पाया।
आज के समय में जहाँ लोग धर्म से दूर होते जा रहे हैं, वहीं आप सभी बहन-बेटियों ने मिलकर सनातन संस्कृति की ऐसी अलख जगाई है, जो वास्तव में प्रशंसनीय और प्रेरणादायक है।
आपने केवल कथा का आयोजन नहीं करवाया…
बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कार देने का कार्य किया है।
जिस घर और समाज की बेटियाँ धर्म से जुड़ जाती हैं, वहाँ भगवान की कृपा स्वयं निवास करती है।
मैं आयोजक समस्त बहन-बेटियों और पूरे परिवार को हृदय से साधुवाद देता हूँ कि आपने तन, मन, धन और समय लगाकर इस कथा को इतना दिव्य और भव्य बनाया।
दिन-रात सेवा करने वाले युवाओं को, माताओं को, व्यवस्था संभालने वाले सभी भाइयों को और यहाँ पधारे प्रत्येक श्रद्धालु को भी मैं बार-बार धन्यवाद देता हूँ।
सच मानिए…
कथा की सफलता केवल भीड़ से नहीं होती,
कथा की सफलता श्रद्धा, सेवा और प्रेम से होती है…
और यहाँ तीनों चीजें भरपूर देखने को मिलीं।
प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि जिस प्रकार आपने मिलकर भगवान का यह कार्य किया है, उसी प्रकार आपके जीवन में सदैव सुख, शांति, समृद्धि और भक्ति बनी रहे।
आपके घर-आँगन में हमेशा मंगल गीत गूंजते रहें, और ठाकुरजी की कृपा आप सब पर बनी रहे।
“धन्य है वो आँगन जहाँ धर्म की ज्योत जलती है,
धन्य है वो बेटियाँ जिनसे संस्कृति पलती है।
भागवत की गंगा जहाँ प्रेम से बहाई जाती है,
वहाँ स्वयं भगवान की कृपा चली आती है।”
आप सभी ने जो प्रेम, सम्मान और अपनापन दिया, उसके लिए मैं सदैव आपका ऋणी रहूँगा।
देशवाल में श्रीमद्भागवत कथा का समापन, 11 जोड़ों ने हवन में दी आहुतियां
जो आप सभी का अपनत्व का भाव था उसका मूल्य अनंत हे ।

