राजस्थानी सृजन को मिलेगा सम्मान, नई कलम और नए सृजन को मिलेगा मंच
30 नवम्बर तक भेजी जा सकेंगी प्रविष्टियां। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर होगा आयोजन।
श्रीडूंगरगढ़: मरूभूमि शोध संस्थान, श्रीडूंगरगढ़ ने राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के विकास-संवर्द्धन के लिए प्रतिवर्ष दिए जाने वाले साहित्यिक पुरस्कारों एवं सम्मानों हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। इस बार प्रकाशित कृतियों के साथ अप्रकाशित पांडुलिपियों को भी सम्मानित किए जाने की व्यवस्था की गई है।
संस्थान के सचिव श्याम महर्षि ने बताया कि राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार, साहित्यिक एवं पाठकीय जुड़ाव तथा महिला एवं बाल साहित्य को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से महाराणा प्रताप राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी सृजन पुरस्कार, श्री सूर्य प्रकाश बिस्सा स्मृति राजस्थानी महिला लेखन सम्मान तथा कला-डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं।
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सम्मान समिति के संयोजक रवि पुरोहित ने बताया कि स्व. श्री भंवरलाल-सम्पत देवी हीरावत, रतननगर के सौजन्य से प्रवर्तित 21 हजार रुपए का महाराणा प्रताप राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार राजस्थानी साहित्य की समग्र सेवा के आधार पर तथा 11 हजार रुपए का पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी सृजन पुरस्कार विगत सात वर्षों में प्रकाशित उल्लेखनीय कृति के लिए प्रदान किया जाएगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. बी. एल. भादानी के अनुसार सूर्य प्रकाशन, बीकानेर के सौजन्य से दिए जाने वाले महिला लेखन सम्मान तथा कलासन प्रकाशन, बीकानेर के सौजन्य से दिए जाने वाले बाल साहित्य सम्मान के लिए केवल मौलिक एवं अप्रकाशित पांडुलिपियां स्वीकार की जाएंगी।
महिला लेखन के लिए 96 से 128 पृष्ठ तथा बाल साहित्य के लिए 64 से 72 पृष्ठ की किसी भी साहित्यिक विधा की पांडुलिपि भेजी जा सकती है।
पांडुलिपि की एक टंकित प्रति तथा ई-मेल द्वारा साफ्ट प्रति 30 नवंबर 2026 तक सचिव, मरूभूमि शोध संस्थान, संस्कृति भवन, एन.एच.-11, जयपुर रोड, श्रीडूंगरगढ़ (राजस्थान)-331803 के पते पर पहुंचना आवश्यक है।

चयनित पांडुलिपि संस्थान द्वारा निःशुल्क प्रकाशित करवाई जाएगी तथा 21 फरवरी 2027, अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर आयोजित समारोह में उसका लोकार्पण किया जाएगा। रचनाकार को प्रकाशित कृति की 41 प्रतियां भी प्रदान की जाएंगी। प्राप्त प्रविष्टियां वापस नहीं की जाएंगी।
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