सम्पूर्ण भारत में प्रसिद्ध पुनरासर हनुमानजी मंदिर के पुजारी नीरज बोथरा ने अजनि माता मन्दिर से दण्ड वत पद यात्रा की
श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर (तोलाराम मारू): उप खंड श्रीडूंगरगढ़ के ग्राम पुनरासर में भारत के सुप्रसिद्ध पुनरासर श्री हनुमानजी महाराज के धाम में भक्तों की श्रद्धा 308 वर्षों से जुड़ी हुई है । मंदिर के पुजारी के रुप में ओसवाल जाति के बोथरा परिवार को यह सौभाग्य प्राप्त है।
बड़ा परिवार होने के कारण हर परिवार अपने क्रम और बारी के अनुसार पुजा अर्चना करता आ रहा है। इसी क्रम में वर्तमान में श्री डूगरगढ का नथमलजी सोहनलालजी परिवार की बारी चल रही है।

इसी पुजारी परिवार के एक युवा सदस्य पुजारी नीरज बोथरा पुत्र छतरसिंह बोथरा ने गुरु पूर्णिमा के दिन अंजनीमाता मंदिर से मुख्य श्री हनुमानजी निज मंदिर से क़रीब दो किलोमीटर की दंण्डवत यात्रा करके पुनरासर बाबा के दर्शन करके आशीर्वाद प्राप्त किया है।
यद्यपि कई बार भक्त जन दंडवत चलकर बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते है किन्तु मंदिर के पुजारी सदस्य ने स्वयं 308 वर्ष में प्रथम बार दंडवत यात्रा करके बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने का नया कीर्तिमान बनाया है।
पुजारी नीरज की यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि उसकी अनन्य भक्ति, निष्काम सेवा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
यात्रा की संपूर्णता के बाद गुरु पूर्णिमा के दिन प्रात:समय में बाबा काश्रृंगार और ज्योत प्रज्ज्वलित करकें आरती स्वयं ही करने काउसने संकल्प किया था और ऐसा स्वयं ही करके अपने संकल्प को बाबा के आशीर्वाद से फलित किया।
उस समय मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने ‘जय पुनरासर बाबा ‘ के जयघोष मदिर परिसर गुजायमान हो गया तथा परिसर क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में परिवर्तित हो गया ।
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पुजारी परिवार अपनी सेवा पूजा की इस बारी में अधिकांश समय पुनरासर रहकर बाबा की सेवा पुजा और भक्ति में संलग्न रहा है। उसके अनुसार सिर्फ़ मंदिर में जाकर दर्शन करना और दीया धुप करना ही बाबा की भक्ति नहीं है बल्कि हर क्षण बाबा का स्मरण करते हुए उसे दिल में रखना ही वास्तविक भक्ति और सेवा है।
अपनी बारी के दौरा प्रसाद को दर्शनार्थियों को वितरित किया जाता । पुजारी परिवार सेवा भक्ति को ही अपना सौभाग्य मानता है ।
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इस दंण्डवत यात्रा में मनीष स्वामी पुत्र श्योपाल श्रीडूंगरगढ़ ने पुरा साथ देकर नीरज का उत्साह बढ़ाया
यात्रा के मार्ग में दर्शक के रुप में उपस्थित पुजारी परिवार की महिलाओं हेमा, मोनिका , अल्पा और बालिकाओं मैत्री,उर्वी और हीर ने भी पुरे उत्साह और श्रद्धा के साथ अपनी सहभागिता क्षमता अनुसार दंडवत यात्रा के रुप में अर्पित की जिसमें हेमा ने पुरी यात्रा में दंडवत चलकर साथ दिया।रास्ते की सेवा में पुजारी सिद्धार्थ, पंकज, अमित, जिनेंद्र और मुकेश ने पुर्ण साथ दिया ।
कैलाश कमल रंजन आदि भी साथ रहे।
नीरज की यह साधना केवल व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश है कि सच्ची भक्ति पर प्रतिष्ठा या परंपरा से नहीं बल्कि समर्पण और निष्काम सेवा से सिद्ध होती है।

पुनरासर बाबा से प्रार्थना है कि उनकी कृपा नीरज तथा पूरे पुजारी परिवार पर सदैव बनी रहे और यह पावन सेवा परंपरा इसी प्रकार श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहे। पुनरासर बाबा की जय का जय घोष लगातार परिसर में चलता रहा। पुजारी निर्मल बोथरा ने बताया कि यहा वर्ष भर श्रद्धालु आते रहते हैं


