किसानों को सहजन आधारित खेती से जोड़ने के लिए काज़री में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

किसानों को सहजन आधारित खेती से जोड़ने के लिए काज़री में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

किसानों को सहजन आधारित खेती से जोड़ने के लिए काज़री में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

सहजन को बताया पोषण, आय और पर्यावरण सुरक्षा का प्रभावी माध्यम

बीकानेर (श्रेयांस बैद): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर द्वारा सतत एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहजन (मोरिंगा) आधारित कृषि प्रणाली विषय पर तीन दिवसीय किसान कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत काजरी परिसर में किया गया। प्रशिक्षण में ज़िले की विभिन्न तहसीलों से 35 किसान हिसा ले रहे हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, बीकानेर के प्राचार्य डॉ. प्रमोद मिश्रा ने किया।

डॉ. प्रमोद मिश्रा ने बताया कि सहजन (मोरिंगा) को आयुर्वेद में ‘अमृत वृक्ष’ माना गया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक शोधों के अनुसार सहजन में लगभग 300 से अधिक बीमारियों से लड़ने की क्षमता विकसित करने वाले पोषक तत्व पाए जाते हैं।


Amazon Product

🛒 Amazon पर खरीदें

👉 यहां क्लिक करें

इसकी पत्तियों में दूध की तुलना में लगभग 4 गुना अधिक कैल्शियम, संतरे से 7 गुना अधिक विटामिन-सी, गाजर से 4 गुना अधिक विटामिन-ए तथा पालक से 3 गुना अधिक आयरन पाया जाता है।

इसके नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, रक्त की कमी दूर करने, पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाने, आंखों की रोशनी बढ़ाने तथा हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायता मिलती है।

सहजन में मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, खनिज और प्रोटीन शरीर को कुपोषण, संक्रमण एवं कई जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बचाने में सहायक माने जाते हैं।

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सहजन आधारित खेती खाद्य एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने बताया कि सहजन का उपयोग मानव उपभोग के साथ-साथ पशु आहार एवं चारे के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य एवं दुग्ध उत्पादन में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सहजन के मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों के लिए रोजगार एवं अतिरिक्त आय के नए अवसर भी उपलब्ध हो सकते हैं।

परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बीरबल ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत अब तक 21 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों के किसान भाग ले चुके हैं।

DSP लक्ष्मी सुथार को हूटिंग करना युवकों को पड़ा भारी, नाकाबंदी में ब्लैक स्कॉर्पियो समेत 6 युवक गिरफ्तार

उन्होंने बताया कि प्रत्येक किसान को प्रशिक्षण के साथ लगभग एक हजार सहजन पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

अब तक लगभग 250 किसानों ने इस परियोजना के तहत पौधारोपण कर सहजन की खेती शुरू की है तथा कई किसान सहजन पाउडर सहित विभिन्न उत्पाद तैयार कर मूल्य संवर्धन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में सहजन केवल एक पौधा नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि (सस्टेनेबल एग्रीकल्चर), पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहा है। किसानों से अधिकाधिक संख्या में प्रशिक्षण से जुड़कर इस परियोजना का लाभ उठाने का आग्रह किया गया।

किसानों को सहजन आधारित खेती से जोड़ने के लिए काज़री में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन एवं तकनीकी सहयोग में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा एवं डॉ. सीताराम जाट की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

किसानों को सहजन आधारित खेती से जोड़ने के लिए काज़री में 3 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

होम
बहुभाषी
E-Paper
मेनू
वेरिफिकेशन
संपर्क करें