ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

‘वन हेल्थ’ की दिशा में महत्वपूर्ण पहल, ऊंटों से प्राप्त नैनोबॉडीज से मानव रोगों की पहचान एवं निदान में भी मिलेगी मदद

बीकानेर (श्रेयांस बैद): भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी), पुणे, महाराष्ट्र के मध्य अनुसंधान एवं वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

एनआरसीसी परिसर में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया एवं एनआईवी, पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने एमओयू दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

ऊंटों एवं मनुष्यों के विषाणुजनित रोगों पर होगा समन्वित अनुसंधान

एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने इस समझौते पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों संस्थान अपनी उपलब्ध वैज्ञानिक विशेषज्ञता, संसाधनों एवं अनुसंधान सुविधाओं का परस्पर उपयोग कर ऊंटों में होने वाले विषाणुजनित (वायरल) रोगों से संबंधित अनुसंधान को आगे बढ़ाएंगे।

इस सहयोग से मानव एवं पशु स्वास्थ्य से जुड़ी संक्रामक बीमारियों की पहचान, आधुनिक निदान पद्धतियों के विकास तथा प्रभावी उपचार संबंधी अनुसंधान को भी नई दिशा मिलेगी।

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

ऊंटों से प्राप्त नैनोबॉडीज से मानव स्वास्थ्य अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

एनआईवी, पुणे के निदेशक डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ‘वन हेल्थ’ अर्थात एकीकृत स्वास्थ्य की अवधारणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अवधारणा मानव, पशु एवं पर्यावरण के स्वास्थ्य के परस्पर संबंधों पर आधारित है।

उन्होंने बताया कि ऊंट प्रजाति के पशुओं से प्राप्त नैनोबॉडीज (विशिष्ट प्रकार के सूक्ष्म एंटीबॉडी) का उपयोग मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों की पहचान एवं उनके गहन अध्ययन में भी किया जा सकता है। इससे भविष्य में अधिक सटीक परीक्षण विधियों और प्रभावी उपचार संबंधी तकनीकों के विकास में सहायता मिलने की संभावना है।

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

जैव-चिकित्सा अनुसंधान से ऊंट संरक्षण को भी मिलेगा बल

कार्यक्रम में एनआरसीसी की पीएमई सेल के प्रभारी डॉ. राकेश रंजन ने एमओयू के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस समझौते के माध्यम से ऊंटों एवं मनुष्यों में होने वाले विषाणुजनित रोगों पर समन्वित अनुसंधान को गति मिलेगी।

राष्ट्रीय आयुर्वेद में फार्मेसी शुरू जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा

साथ ही, जैव-चिकित्सा अनुसंधान में ऊंटों की उपयोगिता के नए आयाम सामने आने से उनके संरक्षण एवं महत्व को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।

वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञ रहे उपस्थित

इस अवसर पर एनआरसीसी एवं एनआरसीई के डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. रमेश देदर, डॉ. रतन कुमार चौधरी, डॉ. श्याम सुंदर चौधरी, डॉ. विश्वरंजन उपाध्याय एवं डॉ. धवलकांत तथा राजुवास के सहायक आचार्य डॉ. रामकुमार उपस्थित रहे।

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

इनके अलावा केंद्र के आशीष पित्ती, राजेश चौधरी, डॉ. राकेश पूनिया, नेमीचंद बारासा, श्री मीतपाल सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।

ऊंटों के वायरल रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी गति, एनआरसीसी बीकानेर एवं एनआईवी पुणे के बीच एमओयू

Share This Article
1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

होम
बहुभाषी
E-Paper
मेनू
वेरिफिकेशन
संपर्क करें